Friday, January 2, 2009

मैने तेरे ही ख्यालों की परवाह की है

हमने कब रिवाजों की परवाह की है
बस वक्त के इशारो की परवाह की है |

जिनके सिरों पर अब बाम नही ,
किसने ऐसी दीवारों की परवाह की है |

वैसे तो था नही मै तेरा मकरूज़ ,
फ़िर भी तेरे तकाजों की परवाह की है |

ये अंधेरे ये बेबसी मेरे नही है
मैने तेरे ही ख्यालों की परवाह की है |

1 comment:

daanish said...

"waise to tha nahi maiN tera marqooz, phir bhi tere tqaazoN ki parvaah ki hai..."
ek bahot achhe khyaal ko lafzoN mei piroya hai aapne...
badhaaee ...!
---MUFLIS---